कृषि (Agriculture) मानव सभ्यता का आधार है और यह वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से हम भोजन, फाइबर, ईंधन और अन्य संसाधनों का उत्पादन करते हैं। यह पौधों की खेती, पशुपालन, मत्स्य पालन, और वानिकी जैसे क्षेत्रों को शामिल करता है। भारत जैसे देश में, जहाँ 60% से अधिक जनसंख्या प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि पर निर्भर है, यह अर्थव्यवस्था और समाज का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस SEO-अनुकूलित ब्लॉग में हम कृषि क्या है, इसके प्रकार, महत्व, तकनीकें, और आधुनिक कृषि के बारे में विस्तार से जानेंगे। यह लेख उन लोगों के लिए उपयोगी है जो कृषि के बारे में बुनियादी और गहन जानकारी चाहते हैं, जैसे छात्र, किसान, और सामान्य पाठक।
कृषि शब्द लैटिन शब्दों “एग्री” (खेत) और “कल्चर” (खेती) से लिया गया है। हिंदी में इसे खेतीबाड़ी भी कहा जाता है। यह वह विज्ञान और कला है जिसमें पौधों और पशुओं को पालकर भोजन, कपड़ा, औषधि, और अन्य उत्पादों का उत्पादन किया जाता है। कृषि में शामिल हैं:
फसल उत्पादन: गेहूँ, चावल, मक्का, दालें, और तिलहन जैसी फसलों की खेती।
पशुपालन: गाय, भैंस, बकरी, मुर्गी आदि का पालन दूध, मांस, और अंडे के लिए।
बागवानी: फल, सब्जियाँ, फूल, और औषधीय पौधों की खेती।
मत्स्य पालन: मछली और अन्य जलीय जीवों का पालन।
वानिकी: वृक्षारोपण और वन संसाधनों का प्रबंधन।
कृषि को विभिन्न प्रकारों में वर्गीकृत किया जा सकता है, जो भारत जैसे विविध देश में प्रचलित हैं:
निर्वाह कृषि: किसान अपने परिवार के लिए भोजन उत्पादन करते हैं। यह छोटे स्तर पर होती है, जैसे बिहार और उत्तर प्रदेश के गाँवों में।
वाणिज्यिक कृषि: बड़े पैमाने पर फसलों का उत्पादन बाजार के लिए, जैसे पंजाब में गेहूँ और हरियाणा में चावल।
जैविक कृषि: रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के बिना प्राकृतिक तरीकों से खेती।
मिश्रित कृषि: फसलों और पशुओं का एक साथ उत्पादन।
बागवानी: फल, सब्जियाँ, और फूलों की खेती, जैसे हिमाचल प्रदेश में सेब।
शुष्क खेती: कम वर्षा वाले क्षेत्रों में खेती, जैसे राजस्थान में बाजरा।
स्थानांतरी खेती: जंगल काटकर अस्थायी खेती, जो अब कम प्रचलित है।
भारत में कृषि का महत्व निम्नलिखित बिंदुओं से समझा जा सकता है:
आर्थिक योगदान: भारत की जीडीपी में कृषि का योगदान 17-18% है। यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था का आधार है।
रोजगार: लगभग 50% भारतीय कार्यबल कृषि और संबंधित क्षेत्रों में कार्यरत है।
खाद्य सुरक्षा: गेहूँ, चावल, दालें, और सब्जियाँ जैसे खाद्य पदार्थों की आपूर्ति।
कच्चा माल: कपास, गन्ना, और तिलहन जैसे कच्चे माल उद्योगों के लिए।
सांस्कृतिक महत्व: भारत में त्योहार जैसे पोंगल, बैसाखी, और मकर संक्रांति कृषि से जुड़े हैं।
आधुनिक युग में कृषि ने तकनीकी प्रगति के साथ कई बदलाव देखे हैं। कुछ प्रमुख तकनीकें हैं:
उन्नत बीज: HYV (High Yielding Variety) बीज, जैसे IR-36 चावल।
सिंचाई तकनीक: ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई, जो पानी की बचत करती है।
कृषि यंत्र: ट्रैक्टर, हार्वेस्टर, और ड्रोन का उपयोग।
जैव प्रौद्योगिकी: जीएम फसलों का विकास, जैसे बीटी बैंगन।
डिजिटल कृषि: किसान सरथी ऐप, ड्रोन, और सेंसर आधारित निगरानी।
जैविक खेती: रासायनिक उर्वरकों के बजाय गोबर और जैव उर्वरकों का उपयोग।
कृषि स्टार्टअप्स: डीहाट और निन्जाकार्ट जैसे प्लेटफॉर्म किसानों को बाजार से जोड़ते हैं।
कृषि क्षेत्र में कई चुनौतियाँ हैं, जिनका समाधान आवश्यक है:
जलवायु परिवर्तन: अनियमित मानसून और सूखा।
मिट्टी की उर्वरता में कमी: अत्यधिक रासायनिक उर्वरकों का उपयोग।
छोटे जोत: 86% भारतीय किसानों के पास 2 हेक्टेयर से कम जमीन।
विपणन समस्याएँ: उचित मूल्य और बाजार की कमी।
ऋण और कर्ज: किसानों की आत्महत्या का एक बड़ा कारण।
भारत सरकार ने कृषि को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएँ शुरू की हैं:
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN): किसानों को प्रतिवर्ष 6,000 रुपये की सहायता।
मृदा स्वास्थ्य कार्ड: मिट्टी की उर्वरता की जाँच।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना: फसल नुकसान पर बीमा कवर।
कृषि विज्ञान केंद्र (KVK): किसानों को प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता।
e-NAM: राष्ट्रीय कृषि बाजार के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म।
कृषि में करियर के कई अवसर हैं:
शैक्षिक पाठ्यक्रम: बीएससी (कृषि), बीटेक (कृषि इंजीनियरिंग), एमएससी (कृषि)।
प्रवेश परीक्षा: CUET (ICAR-UG), AIEEA (PG/PhD)।
नौकरियाँ: कृषि वैज्ञानिक, कृषि अधिकारी, एग्री-बिजनेस मैनेजर, और स्टार्टअप उद्यमी।
संस्थान: भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), IARI, और राज्य कृषि विश्वविद्यालय।